भारत सरकार के आपदा प्रबंधन अधिनियम कोविड-19 के कारण फैल रही महामारी को आपदा घोषित किया गया है। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए भीड़ को नियंत्रित करने हेतु समस्त देश में लॉक डाउन किया गया है ।
तथा कोरोना वायरस के बचाव के लिए यह अपरिहार्य है कि जनपद में समस्त चिकित्सा सेवा सुचारू रूप से चलती रहे। गृह मंत्रालय के अधिसूचना दिनांक 24 मार्च 2020 के द्वारा जारी गाइडलाइन में समस्त हॉस्पिटल, डिस्पेंसरी, केमिस्ट/ उपकरण की दुकानें लैबोरेटरी, क्लीनिक, नर्सिंग होम, एंबुलेंस आदि को चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं तथा मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ चिकित्सा अनुभाग द्वारा भी लॉक डाउन के दौरान प्रदेश में निजी चिकित्सालय को खोलने के संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश दिए गए हैं। जिसको दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी हापुड ने आदेश जारी कर समस्त निजी चिकित्सालयो/ पैथोलॉजी के प्रबंधकों को निम्नलिखित निर्देश जारी किए गए हैं:-*◻◻◻ सामान्य मरीजों के लिए रूटीन ओपीडी नहीं होगी। इमरजेंसी सेवाएं 24 घंटे चलेगी। निजी चिकित्सक/ चिकित्सालय अपने मोबाइल नंबर जनसामान्य को उपलब्ध कराएंगे, जिस पर आवश्यकता पड़ने पर संपर्क किया जा सके। मरीजों को देखते समय सोशल डिस्टेंसिंग एवं मेडिकल प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को होम विजिट करेंगे एवं टेलीफोन के माध्यम से भी परामर्श देंगे। निजी चिकित्सालयो में चिकित्सा एवं उपचार हेतु प्रयोग में आने वाले उपकरण रखेंगे एवं दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे। चिकित्सालयों में समुचित चिकित्सा सेवा सुनिश्चित करने व पुलिस प्रशासन से सहयोग प्राप्त करने हेतु भारतीय मेडिकल एसोसिएशन के माध्यम से संपर्क एवं संवाद स्थापित कर सकते हैं। निजी चिकित्सालय/पैथोलॉजी पूर्व की भांति निर्धारित ही अपना परामर्श/ टेस्ट का शुक्ल लेंगे एवं कोई भी मनमानी फीस/शुल्क वसूल नहीं करेगा। *पैथोलॉजी प्रातः 9:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक खुलेंगे। निजी चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, पैथोलॉजी स्टाफ को प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी नियम अनुसार सहयोग करेंगे। किसी भी समस्या हेतु मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ रेखा शर्मा हापुड़ के मोबाइल नंबर 9837078465 एवं अरविंद कुमार डिप्टी कलेक्टर कलेक्ट्रेट हापुड़ 7355926171 से संपर्क किया जा सकता है। आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा-188 एवं राष्ट्रीय प्रबंधन अधिनियम-2005 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत दंडित किया जायेगा।
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